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महर्षि वशिष्ठ
कुल देवी जोगेश्वरी माता
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Posted by
yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]
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गौत्र : सृष्टि के प्रारम्भ मे जगतपिता सनातन भगवान विष्णु जब अन्नत शैया पर लेटे हुए थे | तो उनकी नाभि से कमल का प्रादुर्भाव हुआ | सिन्दुरुपिणा ब्रह्राजी की संतान है | महर्षि वशिष्ठ एक महान तपस्वी व ज्ञान श्रेष्ठ, त्रिकाल-दर्शी थे | विश्वामित्र एव वशिष्ठ के द्वंद की गाथाए पुराणो मे वर्णित है | आप सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र, महाराज रधु, दशरथ तथा मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम के गुरु तथा राजपुरोहित थे तथा ब्रह्राऋषियों मे सर्वश्रेष्ठ कहे जाते थे | महर्षि वशिष्ठ प्रमुख सत्य ऋषियों मे से एक है |
(अ) महर्षि वशिष्ठ के यज्ञ कुंड से "राजगुरु" की उत्पती हुई इसमे से निम्नलिखित जातियाँ निकली है |
(1) राजगुरु (2) अजारियाँ (3) बाडमेरा (4) सांचोरा (5) मलार (6) कराचियाँ (7) पिपलियों (8) पिंडियों (9) आमेटा (10) मंदपड़ (11) भंवरियाँ (12) सिद्धप
सरस्वती माता वेद यजुर्वेद |
शाखा-मध्यायनी |
प्रवर-पारसकर |
क्षेत्रपाल-काशी, काला - गोरा |
(ब) महर्षि वशिष्ठ के हवन कुंड की ज्वाला से जागरवाल की उत्पती हुई | इनसे निकली जाति जागरवाल है |
जागरवाल जाति की कुल देवी जोगेश्वरी (ज्वालामुखी), चामुंडा (जोगमाया) वेद यजुर्वेद, शाखा-मध्यायनी | प्रवर वशिष्ठ, अत्रय, जातुकरण |
ग्रह सूत्र क्षेत्रपाल काशी, काला - गोरा |
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