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महर्षि पिपलाद
कुलदेवी ब्रह्रानी माता
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Posted by
yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]
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गौत्र : शेषशायी वासुदेव, वासुप्रद, वसुमना, जगन्नाथ भगवान श्री विष्णु की नाभि से उत्त्पन कमल से लोक- ब्रह्राजी का प्राकट्य हुआ | ब्रह्रापुत्र मरीची के त्त्याग से मूर्तमान स्वरूप महर्षि दधीचि का जन्म हुआ | महर्षि दधीचि ने इन्द्र को अपनी अस्थियां व्रज बनाने हेतु दान दे दी थी | महागियानी पिपलाद इन्ही महर्षि दधीचि के पुत्र है | ब्रह्राजी ने स्वय उनके अनूठे मे अमृत भरा था | तथा इसका लालन-पालन पीपल के पेड़ की खोह मे किया था | इसलिए इनका नाम पिपलाद था | इस गौत्र से निकली जातियाँ निम्न है :-
(1) रयगुर (2) गुंदेचा (3) चरक (4) गोटाड़ (गौराऊ) (5) मूथा (6) सोथड़ा (7) नंदवाणा (8) नाणीवाल (9) अक्षरियाँ (10) गोमतीवाल (11) पुष्करणा (12) बलवंशा (ब्लूंचा) (13) भंगोरा (14) मुमाड़िया (15) करनारिया (16) धमानीय (17) घोटा (18) दत्ताणिया (19) सेणपुरा (20) बोड़ाणिया |
इन जातियो की कुलदेवी ब्रह्रानी वेद यजुर्वेद, शाखा-मध्यायनी | प्रवर-मरीची, दधिची, पिपलाद, सूत्र-पारसकर ग्रह सूत्र |
क्षेत्रपाल-काशी, काला - गोरा |
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