
rishis
READON APP
महर्षि कश्यप
कुलदेवी वांकल माता
31
1113

Posted by
yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]
Rajpurohit India Mobile App
Thank you for contributing to the Rajpurohit India community.
गौत्र : अनंत अचिन्त्य, अभेद्ध, परब्रह्रा, परमात्मा, पुरुषोत्तम, पुर्नात्मा भगवान् श्रीनारायण के नाभि कमल से स्रष्टि रचियता प्रजापिता ब्रह्राजी के पुत्र मरिची से कश्यप उत्पन हुए | कश्यप को स्रष्टि का आदिपुरुष कहा जाता है | बली की त्रास से पीड़ित देवताओ के साथ ब्रह्रालोक की यात्रा की | तदनंतर देवो सहित भगवान श्रीनारायण से संतुष्ट होकर भगवान ने वामन अवतार लिया महर्षि कश्यप सप्तऋषियों में से एक है | कहा जाता है कि जिन व्यक्तियों के गौत्र से निकली जातिया निम्नलिखित है :-
(१) बालरिया (२) डाईवाल (३) पलिवाल (४) पुजारिया (५) बुजड (६) हिडार (७) लुणतारा (८) लदीवाल (९) दिवानिया (१०) बुवाड़ी (११) सेपड (१२) सिंघला (१३) स्हवास (१४) बाकलिया (१५) नारायणा (१६) कुत्वा (१७) बोया (१८) बिरपुरा (१९) पोकरणा (२०) अगरवाला (२१) भरतिया (२२) थानक (२३) आंवलिया (२४) भेपड (२५) सामडा (२६) जोशी (२७) कोटीवाल (२८) टकावाल (२९) सेवरिया (३०) सेपाऊ
इन जातियों की कुलदेवी वांकल माता,
वेद यजुर्वेद, शाखा-मध्यायनी | प्रवर-कश्यप, मरिची देवल, सूत्र-पारसकर ग्रह सूत्र क्षेत्रपाल |
काशी, काला - गोरा |
Loading...
Add Comment
समाज की बात, पूरे समाज तक!
कोई खबर, इवेंट या कोई भी अपडेट — पोस्ट करें और अखिल राजपुरोहित समाज से जुड़ें।
Rajpurohit India Community से जुड़ें
पोस्ट, इवेंट और जरूरी अपडेट — सबसे पहले WhatsApp पर।
Advertisement
