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महर्षि उद्दालक
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महर्षि उद्दालक

कुलदेवी माँ मंमाई माता

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Posted by

yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]

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गौत्र : गुरुभक्त उद्दालक का पूर्वनाम आरुणी था | अपने गुरु ओदधोमय ऋषि के आदेश पर मेड बाधने के काम मे जब पाया कि मिट्टी की मेड़ बही जा रही है तो वे स्वयं बहाव के आगे लेट गये तथा मेड़ को बहाने से बचाया |

गुरुजी ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हे उदालक नाम दिया | निम्नलिखित जातियाँ उदालिक गौत्र से निकली है :-

(1) उदेच (उदेश) (2) फांदर (3) लाकावा (4) कोपराउ (5) टमटमिया (6) डिंगारी (7) केसरिया (8) हलसिया (9) बाबरिया(10)मकवाणा (11) रावल (12) टखाड़ी (13) नेतरड़ (14) लच्छीवाल (15) पुणायचा(16) रुदवा (17) टीटोपा (18) जरगालिया (19) कुचला (20) ढ़मढ़मिया (21) दादला (22) कोसाणी (23) डईयाल (24) वोरा (25) त्रवाडी (26) दुधवा (27) उदेरा

इन जातियो की कुलदेवी माता माँ मंमाई (विरात्रा मातेश्वरी),

वेद यजुर्वेद, शाखा-मध्यायनी | प्रवर-कश्यप, वाचा, वेनिती | सूत्र-पारसकर ग्रह सूत्र |

क्षेत्रपाल-काशी, काला - गोरा |

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