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भारद्वाज
कुलदेवी बिह्स्थ माता
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Posted by
yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]
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गौत्र : शेषदायी पर ब्रह्रापरमात्मा पुरुषोत्तम, प्रभु ईशान, स्वयंभु, भगवान श्री विष्णु की नाभि से कमल की उत्पती हुई | कमल से हिरण्यगर्भ ब्रह्राजी के पुत्र महर्षि अंगीरस है तथा उनके पुत्र ब्रहस्पति देवताओ के पुरोहित है इन्ही के बारे मे भगवान श्री कृष्ण ने गीता मे कहा की "पुरोहितो मे मै ब्रहस्पति हूँ |" महर्षि भारदावज इन्ही महानतम ऋषियों मे एक थे | उन्होने कई ग्रंथो की रचना की तथा अपने युग मे विज्ञान की धारा बताई | उन्हे पृथ्वी का सबसे पहला वैज्ञानिक कहा जा सकता है | स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इनके दर्शन किए तथा आशीर्वाद ग्रहण किया |
(अ) भारदावज ऋषि की माता की गौत्र मारधन थी श्री गौड़ से सेवड़ जाती का उदय हुआ | श्री गौड़ जाती की ईष्ट माता राठेश्वरी तथा माता मारधन वेद यजुर्वेद एव गौत्र भारदावज सर्वमान्य है |
(ब) गादिपतियों की गोद के अनुसार ही सोढ़ाजी से साढ़ा जाति से ही बनी है | भारदावज की निम्नलिखित जातियां है |
(1) सेवड़ (2) सोढ़ा एव श्री गौड़
सेवड़ एव सोढ़ा जाति की कुलदेवी माता विसोद, स्वत: अथवा बिसहथ है | कहा जाता है कि बीस भुजाओ वाली इस माता ने प्राचीन काल मे अपने पूजकों को युद्ध मे साधन सम्पन्न तथा हथियार युक्त दुश्मनों के विरुद्ध केवल लठों से ही विजय प्राप्त करा दी थी |
वेद-यजुर्वेद,
शाखा-मध्यायनी,
प्रवर-अंगीरस, ब्रहस्पति, भारद्वाज |
सूत्र-पारसकर गृह सूत्र |
क्षेत्रपाल-काशी, काला - गोरा |
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