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धर्मत की रणभूमि के अमर योद्धा: वीर दलपत सिंह राजपुरोहित
महाराजा जसवंत सिंह प्रथम के विश्वस्त सेनानायक ने मात्र 22 वर्ष की आयु में मातृभूमि के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान
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Posted by
yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]
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मनोहर सिंह राजपुरोहित के वीर पुत्र दलपत सिंह की अमर गाथा ⭐
मारवाड़ की वीर भूमि ने अनेक शूरवीरों को जन्म दिया है, जिनमें वीर दलपत सिंह राजपुरोहित (मनोहरदासोत) का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। तिंवरी ठिकाने से जुड़े वीर दलपत सिंह महाराजा जसवंत सिंह प्रथम के अत्यंत विश्वस्त सेनानायकों में से एक थे। उन्होंने धर्मत के ऐतिहासिक युद्ध में अदम्य साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का परिचय दिया।
सन् 1658 में धर्मत के रणक्षेत्र में केवल 22 वर्ष की आयु में वीरगति प्राप्त कर उन्होंने मारवाड़ की आन, बान और शान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनका बलिदान आज भी समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वीर दलपत सिंह राजपुरोहित का जीवन त्याग, शौर्य और मातृभूमि के प्रति समर्पण की अमर गाथा है।
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