
use full infomation
READON APP
इस शुभ मुहूर्त में बरसेगी हनुमानजी की कृपा
जानिए आज का पंचांग
2

Posted by
yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]
Rajpurohit India Mobile App
Thank you for contributing to the Rajpurohit India community.
26 अप्रेल 2016 को मंगलवार है। इस दिन शुभ वि.सं.: 2073, संवत्सर नाम: सौम्य, अयन: उत्तर, शाके: 1938, हिजरी: 1437, मु.मास: रज्जब-18, ऋतु: ग्रीष्म, मास: वैशाख, पक्ष: कृष्ण है।
शुभ तिथि
चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि सायं 7.11 तक, तदन्तर पंचमी पूर्णासंज्ञक तिथि रहेगी। चतुर्थी तिथि में उग्र व अग्निविषादिक असद् कार्य, शत्रुमर्दन, बन्धन व शस्त्रप्रहार आदि कार्य सिद्ध होते हैं। शुभ कार्य वर्जित हैं।
पर किसी शुभकार्यारम्भ के समय के लग्न में केन्द्र या त्रिकोण स्थान में कोई शुभ ग्रह स्थित हो तो रिक्ता तिथि का दोष परिहृत हो जाता है। पंचमी तिथि में समस्त शुभ, स्थिर व चंचल कार्य सिद्ध होते हैं। चतुर्थी तिथि में जन्मा जातक बुद्धिमान, विद्वान, विशाल हृदय, दानी, पर धन के पूर्णत: सुख के लिए चिन्तित, पराक्रमी और मित्रों से मेलमिलाप रखने वाला होता है।
90 साल के पादरी को मिली भारत की नागरिकता, बोले- भारत माता की जय
नक्षत्र
ज्येष्ठा नक्षत्र सायं 5.54 तक, तदुपरान्त मूल नक्षत्र रहेगा। ज्येष्ठा नक्षत्र में यथा आवश्यक तीक्ष्ण व दारूण संज्ञक कार्य, शत्रुमर्दन, भेद, कूट-कपट के कार्य, प्रहार, लोहा, कारीगरी आदि कार्य सिद्ध होते हैं।
मुण्डन व अक्षरारम्भ आदि कार्य शुभ होते हैं। मूल नक्षत्र में विवाहादि मांगलिक कार्यों सहित, वधू-प्रवेश, यज्ञोपवीत, वास्तु शान्ति, पुंसवन, बाग-बगीचा, कुआ-बावड़ी आदि विषयक कार्य शुभ कहे गए हैं।
ज्येष्ठा और मूल दोनों ही गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र हैं। अत: इन नक्षत्रों में जन्मे जातकों के संभावित अरिष्ट निवारण हेतु 27 दिन बाद जब इन नक्षत्रों की पुनरावृत्ति हो उस दिन नक्षत्र शान्ति करा लेना चाहिए। ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्मा जातक, बुद्धिमान, चतुर, होशियार, कलहप्रद व छिद्रान्वेषी होता है।
बिना तोड़फोड़ ऐसे करें वास्तुदोष का निवारण
योग
परिघ नामक नैसर्गिक अशुभ योग प्रात: 10.19 तक, तदुपरान्त शिव नामक नैसर्गिक शुभ योग रहेगा।
विशिष्ट योग
कुमार नामक शुभ योग सायं 7.11 से।
करण
बव नाम करण प्रात: 6.25 तक, तदुपरान्त बालवादि करण रहेंगे।
चंद्रमा
सायं 5.54 तक वृश्चिक राशि में, इसके बाद धनु राशि में रहेगा।
शुभ मुहूर्त
उक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार मूल नक्षत्र में विवाह का शुभ मुहूर्त है।
दिशाशूल
मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। पर सायं 5.54 तक वृश्चिक राशि के चन्द्रमा का वास उत्तर दिशा में व इसके बाद धनु राशि के चंद्रमा का वास पूर्व में रहेगा। यात्रा में सम्मुख चंद्रमा धनलाभ कराने वाला व दाहिना चंद्रमा सुखप्रद माना जाता है।
राजस्थान पत्रिका.कॉम
Loading...
Add Comment
समाज की बात, पूरे समाज तक!
कोई खबर, इवेंट या कोई भी अपडेट — पोस्ट करें और अखिल राजपुरोहित समाज से जुड़ें।
Rajpurohit India Community से जुड़ें
पोस्ट, इवेंट और जरूरी अपडेट — सबसे पहले WhatsApp पर।
Advertisement
