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अमर शहीद हरीसिंह राजपुरोहित
झाबरा
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Posted by
yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]
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Thank you for contributing to the Rajpurohit India community.
🙏 अमर शहीद को कोटि-कोटि नमन 🕊️
🌿 वन्यजीव रक्षक – अहिंसा के महान प्रतीक 🌿
💐 स्व. श्री हरि सिंह राजपुरोहित जी 💐
जिन्होंने वन्यजीव हिरणों के प्राणों की रक्षा के लिए सहर्ष अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।
धन्य हैं आपके माता–पिता 🙏, धन्य है मरुधरा की पावन धरती 🌵 जिसने
“अहिंसा परमो धर्म” और प्राणी मात्र की रक्षा जैसे संस्कारों से आत्मसात ऐसे वीर को जन्म दिया।
राजस्थान की धरती को यूँ ही वीर वसुंधरा नहीं कहा जाता—
इसके कण–कण में त्याग, बलिदान, शौर्य, ममता, करुणा और मानव सेवा की अमर गाथाएँ बसती हैं।
राजपुरोहित समाज के इतिहास में ऐसे अनेक कर्मयोगी वीर हुए हैं,
जिन्होंने धर्म, मातृभूमि, नारी सम्मान, गौरक्षा और जीव रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए।
इसी परंपरा के उज्ज्वल प्रतीक थे श्री हरि सिंह राजपुरोहित जी।
📍 जन्म: 1 सितम्बर 1976
🏡 ग्राम: झाबरा, तहसील पोकरण, जिला जैसलमेर (राजस्थान)
👨🌾 पिता: श्री राधाकिशन सिंह
👩 माता: श्रीमती जतन कंवर
🐄 गौसेवा, 🌿 पर्यावरण संरक्षण और 🦌 वन्यजीव प्रेम बचपन से ही आपके जीवन का ध्येय रहा।
आर्थिक परिस्थितियाँ साधारण थीं—8वीं तक शिक्षा के बाद पिता के साथ खेती में हाथ बँटाया।
रेगिस्तानी क्षेत्र में पानी की कमी के बावजूद 🚜 टैंकर से पानी लाकर
गायों और वन्यजीवों की प्यास बुझाना आपका धर्म और कर्म था।
🌳 खेजड़ी, बैर, नीम जैसे वृक्ष लगाकर उनका पोषण—आपकी दिनचर्या का अभिन्न अंग था।
💍 विवाह के बाद भी सेवा-पथ में कोई कमी नहीं आई।
छोटी सी ☕ चाय की दुकान से परिवार का पालन करते हुए
गाँव के युवाओं को गौसेवा और वन्यजीव रक्षा के लिए प्रेरित करते रहे।
👨👩👧👦 आपके चार संतानें—2 पुत्र, 2 पुत्रियाँ—आपकी प्रेरणा की जीवित विरासत हैं।
🗓️ 28 अप्रैल 2004 — वह दिन जिसने इतिहास रच दिया।
शाम लगभग 7 बजे पानी का टैंकर लाते समय गोली की आवाज़ सुनकर
आप समझ गए—शिकार हो रहा है।
निडर होकर शिकारियों का सामना किया और कहा—
🗣️ “मेरी जान ले लो, पर इन निरपराध हिरणों का शिकार मत करो।”
⚔️ धमकियों के बावजूद आप डटे रहे।
साथियों को बुलाया—पर तब तक एक हिरण को गोली लग चुकी थी।
आपने शिकारियों को ललकारा, आत्मसमर्पण की बात कही—
परंतु उसी क्षण ओमाराम भील ने आपको गोली मार दी।
🩸 घायल अवस्था में भी आपने शिकारी से बंदूक और मृत हिरण छीन लिया।
पोकरण अस्पताल ले जाते समय अत्यधिक रक्तस्राव हो चुका था…
और यह महान कर्मयोगी, वन्यजीव प्रेमी
नश्वर संसार से विदा हो गया।
🕊️ भले ही एक हिरण का शिकार हुआ,
पर आपकी आत्मा को संतोष था कि अनेकों हिरणों के प्राण बच गए।
🌞 हे अमर वीर!
आपका यह बलिदान समाज ही नहीं, सम्पूर्ण मानवता के लिए वंदनीय है।
आज हर प्राणी, हर संवेदनशील हृदय
आपकी शहादत को नमन करता है।
🙏 शत-शत नमन, अमर शहीद 🙏
🦌🌿
✍️ क्राइम रिपोर्टर – हरीश राजपुरोहित (झाबरा)
📞
9558184868
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