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महर्षि कश्यप
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महर्षि कश्यप

कुलदेवी वांकल माता

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#3351
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Posted by

yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]

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गौत्र : अनंत अचिन्त्य, अभेद्ध, परब्रह्रा, परमात्मा, पुरुषोत्तम, पुर्नात्मा भगवान् श्रीनारायण के नाभि कमल से स्रष्टि रचियता प्रजापिता ब्रह्राजी के पुत्र मरिची से कश्यप उत्पन हुए | कश्यप को स्रष्टि का आदिपुरुष कहा जाता है | बली की त्रास से पीड़ित देवताओ के साथ ब्रह्रालोक की यात्रा की | तदनंतर देवो सहित भगवान श्रीनारायण से संतुष्ट होकर भगवान ने वामन अवतार लिया महर्षि कश्यप सप्तऋषियों में से एक है | कहा जाता है कि जिन व्यक्तियों के गौत्र से निकली जातिया निम्नलिखित है :-

(१) बालरिया (२) डाईवाल (३) पलिवाल (४) पुजारिया (५) बुजड (६) हिडार (७) लुणतारा (८) लदीवाल (९) दिवानिया (१०) बुवाड़ी (११) सेपड (१२) सिंघला (१३) स्हवास (१४) बाकलिया (१५) नारायणा (१६) कुत्वा (१७) बोया (१८) बिरपुरा (१९) पोकरणा (२०) अगरवाला (२१) भरतिया (२२) थानक (२३) आंवलिया (२४) भेपड (२५) सामडा (२६) जोशी (२७) कोटीवाल (२८) टकावाल (२९) सेवरिया (३०) सेपाऊ

इन जातियों की कुलदेवी वांकल माता,

वेद यजुर्वेद, शाखा-मध्यायनी | प्रवर-कश्यप, मरिची देवल, सूत्र-पारसकर ग्रह सूत्र क्षेत्रपाल |

काशी, काला - गोरा |

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