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भारत में स्थित ब्रह्राजी के मंदिर

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भारत में स्थित ब्रह्राजी के मंदिर

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yogesh singh rajpurohit [talkiya / तालकिया]

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भारत में स्थित ब्रह्राजी के मंदिर

पुष्कर

पुष्कर पश्चिमी रेलवे के अजमेर स्टेशन से 7 मील दूर है | यहं ब्रह्राजी ने तपस्या की थी इसलिए यह ब्रह्राजी का प्राचीन मंदिर है |

कालन्द्री

सिरोही जिले में कालन्द्री उप तहसील कस्बे से डेढ़ किलोमीटर दूर ब्रह्रा मंदिर है | जिसकी व्यवस्था क्षेत्रीय नवपरगना राजपुरोहित बंधुओ द्वारा ही की जाती है | जिसकी प्रतिष्ठा वि.सं. 2015 ज्येष्ठ सुद 6 दिनाक 14/5/1958 को हुई |

ब्रह्राधाम आसोतरा

ब्रह्राजी मंदिर बालोतरा स्टेशन से 11 कि.मी. दूर आसोतरा प्याऊ पर स्थित है | यह मंदिर खेताराम जी     महाराज ने बनवाया | इसकी विशेषता यह है कि इसके निर्माण में लगी सम्पूर्ण धनराशि राजपुरोहित समाज से एकत्रित की है | जिसकी प्रतिष्ठान दिनाक 5 मई 1984 को श्री खेतारामजी महाराज द्वारा की गई है |

निम्बेश्वर

पश्चिमी रेलवे के फालना स्टेशन के पास कुछ दूरी पर निम्बेश्वर महादेव का स्थान है जहा ब्रह्राजी की मूर्तिया पाई गई है |

ढालोप

पश्चिमी रेलवे के रानी स्टेशन के पास कुछ दूरी पर ढालोप गाँव है जहा ब्रह्राजी की ऐतिहासिक मूर्तिया मिली है |

नाभिकमल तीर्थ

कुरु क्षेत्र के पास थानेसर शहर है उसी के निकट नाभिकमल तीर्थ है | यहाँ भगवान विष्णु का प्रमुख मंदिर है तथा उसके पास ही ब्रह्रा का मंदिर है |

जावा

भारतीय संस्क्रती का केंद्र यह द्वीप जावा प्राचीन समय में बहुत प्रसिद्ध रहा है | यहाँ प्राबनानक नामक शिव मंदिर प्रमुख है | शिव मंदिर के दोनों तरफ विष्णु व ब्रह्रा के मंदिर है |

पिंडारा

द्वारिका से 20 मील दूर पिंडारा है | इसे प्राचीनकाल में पिंडारक या पिंडतारक कहते थे | यहाँ सरोवर के किनारे कपाल मोचन महादेव का प्रमुख मंदिर है तथा कहते है कि श्राद्ध करके दिए हुए पिंड महर्षि दुर्वासा के वरदान से सरोवर में डालने पर वे डूबते नहीं, जल पर तैरते है | यहाँ भी ब्रह्राजी की मूर्ति है |

खेड़ ब्रह्रा

इडर से 15 मील दूर खेड़ ब्रह्रा स्टेशन है यहाँ हिरण्याक्षी, कोसंबी और भिमाक्षी नदियों का संगम है | यहाँ त्रिवेणी पर भृगु आश्रम है तथा भृगुनाथ महादेव का यहाँ प्रमुख मंदिर है | यहाँ शिवरात्रि को मेला भी लगता है | यहाँ भृगु ने तप किया था तथा ब्रह्रा ने यज्ञ किया था | त्रिवेणी पर एक तरफ महादेव का व दूसरी तरफ ब्रह्रा का मंदिर है |

शुक्ल तीर्थ

भरूच से 10 मील नर्मदा के तट पर शुक्ल तीर्थ है यहाँ कवि ओकेरेश्वर और शुक्ल नाम के कुंड थे, जो लुप्त हो गये है | यहाँ शुक्लनारायण विष्णु की श्वेत चतुभुर्ज मूर्ति है | इसके एक बाजू शिव एवं दूसरी बाजू ब्रह्राजी की मूर्ति है |

धारापुरी

समुद्र के मध्य एक द्वीप है | बम्बई के निकट जिसे एलिफेंटा भी कहते है, यही धारापुरी है | यहाँ 16 फीट ऊची अर्धनारीश्वर शिव की मूर्ति है | उसके बायें विष्णु तथा दाये ब्रह्राजी बैठे है |

 

नागपत्तम

तंजोर-नागौर रेलवे लाइन पर नेगापट्म स्टेशन है | यहाँ विशाल शिव तथा विष्णु मंदिर समुन्द्र तट पर है वही ब्रह्राजी का भी एक मंदिर है | इन्हें यहाँ पैरुमलस्वामी कहते है |

शुचीन्द्रम

कन्याकुमारी से त्रिवेद्रम के सीधे मार्ग के बीच शुचीन्द्रम 8 मील पर आता है | इंद्र को गौतम के शाप से यही मुक्ति मिली थी और प्रज्ञा-कुंड सरोवर पर शिवजी का विशाल मंदिर है | इसी मंदिर में विष्णु और ब्रह्रा की मूर्तिया है |

त्रिवेन्द्रम

इसका नया नाम तिरुअनंतपुरम है तथा पुराणों में अनन्तमवनम कहा जाता है | यहाँ किले में पधह्नाथ भगवान विष्णु की विशाल काले पत्थर की मूर्ति है | नाभिकमल पर ब्रह्राजी बैठे है तथा भगवान शेष शैया पर शयन किये हुए है | विष्णु का दाहिना हाथ शिवलिंग के ऊपर स्थित है |

मौथा

मौथा गाँव कपडवंज (गुजरात) के पास आया हुआ है | यहाँ पर ब्रह्राजी का अति प्राचीन मंदिर है एवं 5 फीट ऊँची मूर्ति स्थित है |

 

थाईलैंड

दक्षिण एशियाई देश थाईलैंड में भी एक अतिप्राचीन ब्रह्रा मंदिर है |

 

तिरुतलम

त्रिवेद्र तिरुअनंतपुरम से 3 मील पर तिरुतलम है | यहाँ मत्स्य तीर्थ सरोवर है | यहाँ मत्स्यावतार भगवान की मूर्ति के साथ-साथ विष्णु, शिव, परशुराम तथा ब्रह्रा की मूर्तिया है | कहते है कि यहा परशुराम ने श्राद्ध किया था|

आबू

पचिश्म रेलवे के आबू स्टेशन से आबू पर्वत 17 मील दूर है | कहते है कि यहाँ पृथ्वी में एक छिद्र था जो पाताल लोक को जाता था | यहाँ गोमती कुंड के पास ब्रह्राजी की मूर्ति है |

बसंतगढ़

सिरोही जिले की पिण्डवाडा तहसील में बसंतगढ़ गाँव में भी एक ब्रह्रा मंदिर है | जिसकी व्यवस्था क्षेत्रीय राजपुरोहित बंधुओ द्वारा की जाती है |

हाथल

सिरोही जिले के हाथल गाँव में भी एक अति प्राचीन ब्रह्राजी का मंदिर है |

 

 

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